Sunday, 11 December 2011

जम्मू-कश्मीर के कानून मंत्री सागर के काफिले पर आतंकियों का हमला

श्रीनगर .  कानून, संसदीय मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर पर रविवार देर शाम को आतंकियों ने हमला कर दिया। सागर इस हमले में बाल-बाल बच गए। हमले में एक सुरक्षा कर्मी की मौत हो गई तथा दो पुलिस कर्मियों सहित तीन लोग घायल हुए हैं। जिस समय यह हमला हुआ सागर भतीजी के शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। पिछले छह सालों के दौरान वादी में किसी मंत्री पर यह पहला हमला है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले पर चिंता जताई है।  
 एसएसपी श्रीनगर आशिक बुखारी के अनुसार मंत्री अली मोहम्मद सागर अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने जा रहे थे। जैसे ही उनका काफिला नवां बाजार के शाह मोहल्ला स्थित अपने भाई के घर के पास पहुंचा तो गली में छिपे आतंकियों ने दोनों तरफ से अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दीं। लेकिन जिस कार में सागर बैठे हुए थे वह गोलियों की चपेट में आने से बच गई। जबकि काफिले की एक कार गोलियों से छलनी हो गई। इस कार में बैठे तीन सुरक्षाकर्मी गुलजार अहमद, मोहम्मद याकूब, फिरोज अहमद तथा ड्राइवर अली मोहम्मद गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल ले जाते हुए गुलजार अहमद की मौत हो गई।  एसएसपी के अनुसार मंत्री सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हैं।  
 
 प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही आतंकियों ने गोलियां चलाई वहां अफरातफरी मच गई। जिसका लाभ उठाते हुए आतंकी वहां से भागने में सफल हो गए। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। आतंकियों की तलाश की जा रही है। खबर लिखे जाने तक आतंकियों को पकड़ा नहीं जा सका था और न ही किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है।  
 फिरदौस सिनेमा को जलाने का प्रयास :इस हमले से पहले कुछ उपद्रवियों ने हवल क्षेत्र में स्थित फिरदौस सिनेमा का जलाने का भी प्रयास किया। 

राजधानी के 100 साल पूरे: 1911 में ढहता हुआ शहर था दिल्‍ली

नई दिल्ली. देश की राजधानी बने हुए आज दिल्ली को 100 साल पूरे हो गए। 12 दिसंबर, 1911 को जॉर्ज पंचम का कोरोनेशन पार्क में भारत के नए सम्राट के रूप में राज्याभिषेक (तस्‍वीर में) हुआ था। समारोह के समापन के तुरंत बाद ही जॉर्ज ने इस घोषणा से सबको चौंका दिया, ‘हमने निर्णय किया है कि भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की जाए।’  
 
1911 में दिल्ली एक ढहता हुआ पुराना शहर था। चाहरदीवारी से घिरे शहर के बाहर केवल गांव और कुतुब-निजामुद्दीन की दरगाह के पास कुछ बस्तियां थीं। एडवर्ड लुटियन और हरबर्ट बेकर की देखरेख में 1911 से 1931 के मध्य नई राजधानी ने आकार लिया। लुटियंस और बेकर ने इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन सहित दिल्ली को आधुनिक रूप दिया।   
 
दिल्ली कुल आठ शहरों को मिलाकर बनी है। लेकिन दिल्ली का इतिहास 3000 साल पुराना है। माना जाता है कि पांडवों ने इंद्रप्रस्थ का किला यमुना किनारे बनाया था, लगभग उसी जगह जहां आज मुगल जमाने में बना पुराना किला है। हर शासक ने दिल्ली को राजधानी के तौर पर अलग पहचान दी। कई बार इस शहर पर हमले भी हुए। शासन के बदलने के साथ-साथ, हर सुल्तान ने इलाके के एक हिस्से पर अपना किला बनाया।
 
1899 में शुरू हो गई थीं अदालतें
 
दिल्ली को राजधानी बने सौ साल भले ही आज पूरे हो गए हों, लेकिन यहां ब्रिटिश शासनकाल (वर्ष 1899) से ही आठ अदालतें न्याय मुहैया करा रही थीं। शुरुआत में दिल्ली की ये जिला अदालतें श्रीमती फोर्सटर के घर पर लगती थीं। 1899 में एच अब्दुल रहमान अताउल रहमान बिल्डिंग में कुछ और कमरे किराए पर लिए गए। 1949 में कश्मीरी गेट स्थित पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद 1953 में 22 अधीनस्थ दीवानी अदालतों को 1 स्कीनर्स हाउस स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कालेज की इमारत और कश्मीरी गेट में स्थानांतरित कर दिया गया। यह अदालतें 31 मार्च 1958 तक इन्हीं इमारतों में चलती रहीं। 1926 में दिल्ली के अंदर दो प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट तथा एक द्वितीय श्रेणी अवैतनिक मजिस्ट्रेट कार्यरत थे। 

‘पीएम को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए’




नई दिल्ली:  बीजेपी के नेता अरुण जेटली ने स्टैंडिग कमेटी पर देश से वादा तोड़ने का आरोप लगाया है। भाजपा ने संसद की स्थायी समिति की ओर से लोकपाल विधेयक के संदर्भ में दिए प्रारूप को संसद की भावना के प्रतिकूल बताते हुए रविवार को कहा कि निचले स्तर की नौकरशाही के साथ ही प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे पक्ष की ओर से आयोजित खुली बहस में भाजपा नेता अरूण जेटली ने कहा, ‘देश को एक मजबूत और निष्पक्ष लोकपाल की जरूरत है। स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव दिया है, वह संसद की ओर से किए वादे को तोड़ने वाला है।’

उन्होंने कहा, ‘संसद की भावना के दर्शाने वाले लोकसभा के प्रस्ताव में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, नागरिक आचार संहिता और प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये बातें शामिल नहीं हैं। हम ऐसे लोकपाल को स्वीकार नहीं कर सकते।’

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जेटली ने कहा, ‘संसद ने देश से जो वादा किया था, उसे तोड़ा नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के प्रस्ताव को हम स्वीकार नहीं कर सकते। शासन में रहते हुए ही प्रधानमंत्री इसके दायरे में आने चाहिए।’

जेटली ने कहा, ‘संसद के भीतर और बाहर की बहस में कोई टकराव एवं अंतर्विरोध नहीं है। कानून संसद में बनते हैं, लेकिन जनमत के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है। किसी भी कानून को लेकर संसद में बहस होनी चाहिए, लेकिन जनता क्या चाहती है उस पर भी ध्यान देना होगा।’

स्थायी समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए जेटली ने कहा, ‘‘स्थायी समिति के प्रस्ताव में सिर्फ प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने की बात की गई है, इसे हम स्वीकार नहीं कर सकते। संसद की भावना यह थी कि सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए। हम चाहते हैं कि निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाए।

उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि सीबीआई का दुरुपयोग होता रहा है। सीबीआई को सरकार के नियंत्रण से बाहर लाने की जरूरत है। सीबीआई को एक स्वतंत्र जांच एजेंसी बनाना चाहिए, जिसका प्रासंगिक नियंत्रण लोकपाल के हाथ में हो।’

जेटली ने कहा, ‘पिछले कई वषरे से हम न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात सुन रहे हैं। यह चिंता का विषय है। इसको लेकर भी एक सशख्त कानून बनना चाहिए।’ इस मौके पर भाजपा के सहयोगी अकाली दल के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा, ‘इस मामले पर हम भाजपा के साथ हैं। हम संसद में अन्ना की इच्छाओं के साथ चलेंगे। हम पूरी तरह अन्ना के साथ हैं।’

कोलकाता अग्निकांड : एएमआरआई के खिलाफ प्रदर्शन जारी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में 91 से अधिक लोगों की मौत से गुस्साए लोगों ने रविवार को भी अपना प्रदर्शन जारी रखा। विभिन्न पोस्टर लेकर अस्पताल परिसर में जुटे सैकड़ों लोग अधिकारियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे।



स्थानीय निवासियों ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा 'जबरन छीना' गया अस्पताल के नजदीक का खेल मैदान वापस देने की मांग भी की।



दक्षिणी कोलकाता के ढाकुनिया इलाके पंचाननतला के कुछ निवासी हाथों में पोस्टर लिए हुए थे, जिस पर लिखा था, "अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बल की मदद से जमीन छीन ली। हम चाहते हैं कि वह जमीन जो हमारा खेल मैदान था, हमें वापस दी जाए।"



अस्पताल के नजदीक रहने वाले शम्भू दास ने कहा, "उस जमीन पर उन्होंने एक पार्क बना लिया है जो हमारे लिए थी। वह जमीन कोलकता महानगर विकास प्राधिकरण (केमडीए) की है। अस्पताल प्रबंधन ने वह जमीन जबरन हड़प ली। हम चाहते हैं कि वह जमीन हमें वापस दी जाए, ताकि पहले की तरह हम उसका उपयोग खेल मैदान के रूप में कर सकें।"




एक अन्य पोस्टर में दिखाया गया कि स्थानीय लोग हाथों में कई ट्रॉफियां लिए हुए हैं जो उन्होंने कथित मैदान पर खेलकर जीती थी और वे अधिकारियों पर 2006 में जबरन जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं।




लोगों के प्रदर्शन पर टिप्पणी देने के लिए अस्पताल के अधिकारी सामने नहीं आए।





सोशलिस्ट युनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट (एसयूसीआई-सी) सहित कई राजनीतिक दलों के पोस्टर भी अस्पताल की दीवारों पर चिपके हुए थे जिनमें निजी-सरकारी साझेदारी के तहत बने इस अस्पताल में गलत कार्य करने वालों को कड़ी सजा देने की मांग की गई थी।



उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को अस्पताल के बेसमेंट में आग लगी थी। आग अन्य मंजिलों तक फैल गई और इसकी चपेट में आने से मरीजों और कर्मचारियों सहित 91 लोगों की मौत हो गई। कमरों में धुआं भर जाने पर अधिकांश नर्स, चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारी तो भाग निकले, लेकिन कई गम्भीर मरीज जो बिस्तर से उठ नहीं पाए, उनकी दम घुटने से मौत हो गई।

अन्ना के उपवास को राजनीतिक दलों का मिला समर्थन

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर रविवार को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सांकेतिक उपवास पर बैठे प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का जबर्दस्त समर्थन मिला। उन्होंने अन्ना हजारे को संसद में प्रभावी लोकपाल बनवाने का भरोसा भी दिलाया। वहीं, अन्ना हजारे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के यहां आने से उनके आंदोलन को ताकत मिली है।

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर उपवास शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम' व 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले वह राजघाट गए और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित 
की। इस बीच उनके सैकड़ों समर्थक जंतर-मंतर पर पहुंच चुके थे।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी मंच पर पहुंचे और उन्होंने प्रभावी लोकपाल के पक्ष में विचार व्यक्त किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण जेटली और बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने 
प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की।

वहीं, जनता दल (युनाटेड) के शरद यादव ने कहा, "आपके (टीम अन्ना) जनलोकपाल विधेयक में कोई अल्पविराम या पूर्ण विराम भी नहीं बदलना चाहिए।" उनके सम्बोधन के बाद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के 
साथ उनका स्वागत व धन्यवाद किया।

भाजपा नेता जेटली ने संसद की स्थायी समिति की ओर से सौंपी गई लोकपाल रिपोर्ट पर संसद की भावना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे ने जब अपना पिछला अनशन तोड़ा था 
तो उस समय संसद के दोनों सदनों ने अपनी भावना प्रदर्शित की थी, जिसमें राज्यों के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति, सिटिजन चार्टर, निचले स्तर की अफसरशाही को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद की भावना के अनुरूप नहीं है।" उन्होंने कहा, "स्थायी समिति में हमारे दल के जो सदस्य थे, उन्होंने असहमति के नोट के साथ अपने विचार रखे हैं। हमारी राय स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने चाहिए और केवल ग्रुप 'ए' और 'बी' के अधिकारी इसके दायरे में हों और 'सी' और 'डी' ग्रुप के अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाएगा, इसे हम स्वीकार करने वाले नहीं हैं।"

समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि अगस्त में अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार ने जो प्रस्ताव पारित करवाया था कि उससे पीछे हटकर वह संसद के साथ धोखा कर 
रही है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अन्ना हजारे को अपने जनलोकपाल विधेयक के 'प्रत्येक शब्द' को स्वीकार करने के लिए जिद नहीं करनी चाहिए।

वहीं, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के के. येरन ने कहा कि सभी दलों को टीम अन्ना का जनलोकपाल विधेयक स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए 
उन्होंने कहा कि मां-बेटे भ्रष्टाचार से लड़ने को लेकर गम्भीर नहीं हैं।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने कहा कि उनकी पार्टी न केवल सरकार के भीतर, बल्कि निजी क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिए प्रभावी लोकपाल पक्ष में है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र 
में भ्रष्टाचार से लड़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे स्वतंत्रतापूर्वक राष्ट्रीय सम्पदा 'लूट' रहे हैं। हमें कॉरपोरेट जगत में भ्रष्टाचार पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि वह हालांकि कई मुद्दों पर अन्ना पक्ष के साथ हैं, लेकिन जनलोकपाल विधेयक को पूरी तरह स्वीकार किए जाने को लेकर सामाजिक 
कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाई जा रही सख्ती के खिलाफ हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से लचीला रुख अपनाने को कहा।

भारत से अनशन पर अन्ना, लोकपाल पर खुली बहस

अन्ना हजारे लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के खिलाफ आज एक दिन का सांकेतिक अनशन कर रहे हैं। हजारे ने भारत माता की जय, वन्दे मातरम के उद्घोष के साथ अपने अनशन की हुंकार भरी। उनके साथ में मंच पर शांति भूषण, प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, अरविंद गौड़, किरण बेदी और कुमार विश्वास भी हैं। अनशन के दौरान टीम अन्ना लोकपाल के मुद्दे पर खुली बहस करा रही है। बीजेपी से वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सीपीएम की नेता वृंदा करात, सीपीआई के नेता एबी बर्धन और चंद्र बाबू नायडू हिस्सा ले रहे हैं। जेडीयू नेता शरद यादव और समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव मंच पर उपस्थित रहे। कांग्रेस ने इस बहस में भाग लेने से मना कर दिया। इस बहस में बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि देश को एक मजबूत और निष्पक्ष लोकपाल की जरूरत है। स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव दिया है, वह संसद की ओर से किए वादे को तोड़ने वाला है।

उन्होंने कहा कि संसद की भावना के दर्शाने वाले लोकसभा के प्रस्ताव में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, नागरिक आचार संहिता और प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये बातें शामिल नहीं हैं। हम ऐसे लोकपाल को स्वीकार नहीं कर सकते। सीपीएम नेता बृंदा करात और सीपीआई नेता एबी बर्धन ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए। जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत बहस के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।


ससे पहले अनशन के मंच से किरण बेदी ने कहा कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि एजेंसी के विभिन्न राज्यों के हजारों कर्मचारी अधिकारी इसमें आ सकें। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीआई को छोड़ना नहीं चाहती, क्योंकि सीबीआई की अल्मारियां फाइलों से भरी पड़ी हैं। लोकपाल से डर पैदा होगा सुशासन पैदा होगा। सरकारी सेवा जो मेवा बन गई है, फिर सेवा बन जाएगी। बेदी ने कहा कि नेहरू के समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ तंत्र बनाने की बात चल रही है...काश नेहरू जी ‘सिस्टम’ दे जाते। 1962 से 2011 हो गया पर अब जन लोकपाल लाना ही होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों को ‘धोखा’ दिया है और जंतर मंतर पर एकत्र हुए लोग प्रार्थना करेंगे कि सरकार को सद्बुद्धि आए। हजारे ने जंतर-मंतर पर सुबह करीब सवा 10 बजे अपना अनशन शुरू किया। इस मौके पर एकत्रित उनके समर्थक तिरंगा लहराते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे।

हजारे ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए अपने समर्थकों से कहा कि मेरा अनशन शुरू हो गया है। मैं अभी ज्यादा नहीं बोलूंगा। सफेद कुर्ता और टोपी पहने हजारे का उनके समर्थकों ने अनशन सथल पर जोरदार स्वागत किया, जो ठंड की परवाह किए बिना सबुह से ही एकत्र थे। हजारे के साथ टीम अन्ना के अरविन्द केजरीवाल मनीष सिसौदिया, संजय सिंह और कुमार विश्वास जैसे सदस्य भी शामिल हुए। जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले हजारे राजघाट गए और वहां लगभग आधे घंटे तक ध्यान लगाया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं ठीक और स्वस्थ हूं। लोकपाल के मुद्दे पर हजारे का यह तीसरा और जंतर-मंतर पर दूसरा विरोध प्रदर्शन है। उनका पहला विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 5 अप्रैल को शुरू हुआ था और यह पांच दिन चला था। तब सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक संयुक्त समिति बनाई थी, जिसमें आधिकारिक प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल थे। उन्होंने अपना दूसरा अनशन अगस्त में रामलीला मैदान में किया था, जो 13 दिन चला था।

इस मौके पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ममता ने एफडीआई पर सही रुख अपनाया है। उन्हें लोकपाल के मुद्दे पर भी ऐसा ही रुख अपनाना चाहिए। कपिल सिब्बल ने आंदोलन के बाद समूह में भेजे जाने वाले एसएमएस पर रोक लगा दी और अब फेसबुक ट्विटर पर सेंसरशिप की बात कर रहे हैं पर फिर भी वह इस भीड़ को इकट्ठा होने से नहीं रोक पाए। उन्होंने स्थायी समिति पर हमला बोलते हुए कहा कि 30 सदस्यों में दो अनुपस्थित रहे 17 असहमत रहे और एक ने तैयार किया, जिसमें सात कांग्रेस सदस्य और लालू, अमर ने यह रिपोर्ट तैयार की, जिसने लोकपाल को डाकघर बनाकर रख दिया है।

इस मौके पर शांति भूषण ने कहा कि अन्ना ने इतनी बड़ी क्रांति शुरू कर दी है जिसे न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया देख रही है और सरकार की नींद उड़ गई है। आजादी की लड़ाई के लिए जैसे युवा झंडा लिए खड़े थे, वैसे ही आज इकट्ठा हैं। अन्ना दूसरे गांधी हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने लोकपाल को जांच तक

का अधिकार नहीं दिया। यह धोखाधड़ी है, जिसका जवाब अभिषेक मनु सिंघवी को देना होगा। शांति भूषण ने कहा कि जिस दिन दो तीन भ्रष्ट न्यायाधीश जेल चले गए उस दिन न्यायपालिका से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते


डरबन। डरबन में जारी जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ [ईयू] के बीच तीखे मतभेद उभरने के बीच ईयू के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने कहा कि विकसित देश भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। लेकिन उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि पर सहमत होने की आवश्यकता है।
ईयू की जलवायु आयुक्त कोनी हेडेगार्ड ने कहा कि हम यह सोच भी नहीं सकते कि हम भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए कहेंगे।
हेडेगार्ड ने कहा कि हम विकास संबंधी भारत के अधिकार को पूरी मान्यता देते हैं। हम इससे पूरी तरह से अवगत हैं कि भारत को विकास संबंधी आवश्यकताओं और ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विश्व में ऐसी संधि होनी चाहिए जिसमें सब के लिए समान कानूनी मूल्य हों।
उन्होंने कहा कि हम भारत को कभी नहीं कहेंगे कि वह विकसित दुनिया के समान ही जिम्मेदारी उठाए। सम्मेलन के दौरान भारत और ईयू के बीच तनाव चरम पर दिखा। इस सम्मेलन में 194 देश जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए विचार विमर्श कर रहे हैं। लेकिन अब तक इसमें कोई समझौता नहीं हो सका है।
सम्मेलन के शुक्रवार को ही समाप्त होना था लेकिन अब इसके रविवार के दोपहर बाद संपन्न होने की संभावना है। शनिवार की शाम तक कई देशों के मंत्री लौट गए थे लेकिन कई प्रमुख देशों के शीर्ष वार्ताकार अब भी मौजूद हैं। इस वार्ता का अहम सवाल यह है कि क्या भारत, चीन और अमेरिका यूरोपीय संघ के खाका को स्वीकार करते हैं या नहीं। इन देशों पर 2015 तक कानूनी रूप से बाध्यकारी एक संधि पर सहमत होने का दबाव है ताकि संधि 2020 तक प्रभावी हो सके। भारत ने अपना रुख व्यक्त करते हुए कहा है कि गरीबी उन्मूलन उसकी प्रमुख वरीयता है।