प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर रविवार को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सांकेतिक उपवास पर बैठे प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का जबर्दस्त समर्थन मिला। उन्होंने अन्ना हजारे को संसद में प्रभावी लोकपाल बनवाने का भरोसा भी दिलाया। वहीं, अन्ना हजारे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के यहां आने से उनके आंदोलन को ताकत मिली है।
प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर उपवास शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम' व 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले वह राजघाट गए और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच उनके सैकड़ों समर्थक जंतर-मंतर पर पहुंच चुके थे।
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी मंच पर पहुंचे और उन्होंने प्रभावी लोकपाल के पक्ष में विचार व्यक्त किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण जेटली और बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की।
वहीं, जनता दल (युनाटेड) के शरद यादव ने कहा, "आपके (टीम अन्ना) जनलोकपाल विधेयक में कोई अल्पविराम या पूर्ण विराम भी नहीं बदलना चाहिए।" उनके सम्बोधन के बाद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत व धन्यवाद किया।
भाजपा नेता जेटली ने संसद की स्थायी समिति की ओर से सौंपी गई लोकपाल रिपोर्ट पर संसद की भावना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे ने जब अपना पिछला अनशन तोड़ा था तो उस समय संसद के दोनों सदनों ने अपनी भावना प्रदर्शित की थी, जिसमें राज्यों के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति, सिटिजन चार्टर, निचले स्तर की अफसरशाही को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद की भावना के अनुरूप नहीं है।" उन्होंने कहा, "स्थायी समिति में हमारे दल के जो सदस्य थे, उन्होंने असहमति के नोट के साथ अपने विचार रखे हैं। हमारी राय स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने चाहिए और केवल ग्रुप 'ए' और 'बी' के अधिकारी इसके दायरे में हों और 'सी' और 'डी' ग्रुप के अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाएगा, इसे हम स्वीकार करने वाले नहीं हैं।"
समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि अगस्त में अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार ने जो प्रस्ताव पारित करवाया था कि उससे पीछे हटकर वह संसद के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अन्ना हजारे को अपने जनलोकपाल विधेयक के 'प्रत्येक शब्द' को स्वीकार करने के लिए जिद नहीं करनी चाहिए।
वहीं, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के के. येरन ने कहा कि सभी दलों को टीम अन्ना का जनलोकपाल विधेयक स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मां-बेटे भ्रष्टाचार से लड़ने को लेकर गम्भीर नहीं हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने कहा कि उनकी पार्टी न केवल सरकार के भीतर, बल्कि निजी क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिए प्रभावी लोकपाल पक्ष में है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार से लड़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे स्वतंत्रतापूर्वक राष्ट्रीय सम्पदा 'लूट' रहे हैं। हमें कॉरपोरेट जगत में भ्रष्टाचार पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि वह हालांकि कई मुद्दों पर अन्ना पक्ष के साथ हैं, लेकिन जनलोकपाल विधेयक को पूरी तरह स्वीकार किए जाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाई जा रही सख्ती के खिलाफ हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से लचीला रुख अपनाने को कहा।
प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर उपवास शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम' व 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले वह राजघाट गए और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बीच उनके सैकड़ों समर्थक जंतर-मंतर पर पहुंच चुके थे।
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी मंच पर पहुंचे और उन्होंने प्रभावी लोकपाल के पक्ष में विचार व्यक्त किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण जेटली और बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की।
वहीं, जनता दल (युनाटेड) के शरद यादव ने कहा, "आपके (टीम अन्ना) जनलोकपाल विधेयक में कोई अल्पविराम या पूर्ण विराम भी नहीं बदलना चाहिए।" उनके सम्बोधन के बाद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत व धन्यवाद किया।
भाजपा नेता जेटली ने संसद की स्थायी समिति की ओर से सौंपी गई लोकपाल रिपोर्ट पर संसद की भावना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे ने जब अपना पिछला अनशन तोड़ा था तो उस समय संसद के दोनों सदनों ने अपनी भावना प्रदर्शित की थी, जिसमें राज्यों के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति, सिटिजन चार्टर, निचले स्तर की अफसरशाही को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद की भावना के अनुरूप नहीं है।" उन्होंने कहा, "स्थायी समिति में हमारे दल के जो सदस्य थे, उन्होंने असहमति के नोट के साथ अपने विचार रखे हैं। हमारी राय स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने चाहिए और केवल ग्रुप 'ए' और 'बी' के अधिकारी इसके दायरे में हों और 'सी' और 'डी' ग्रुप के अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाएगा, इसे हम स्वीकार करने वाले नहीं हैं।"
समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि अगस्त में अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार ने जो प्रस्ताव पारित करवाया था कि उससे पीछे हटकर वह संसद के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अन्ना हजारे को अपने जनलोकपाल विधेयक के 'प्रत्येक शब्द' को स्वीकार करने के लिए जिद नहीं करनी चाहिए।
वहीं, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के के. येरन ने कहा कि सभी दलों को टीम अन्ना का जनलोकपाल विधेयक स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मां-बेटे भ्रष्टाचार से लड़ने को लेकर गम्भीर नहीं हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने कहा कि उनकी पार्टी न केवल सरकार के भीतर, बल्कि निजी क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिए प्रभावी लोकपाल पक्ष में है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार से लड़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे स्वतंत्रतापूर्वक राष्ट्रीय सम्पदा 'लूट' रहे हैं। हमें कॉरपोरेट जगत में भ्रष्टाचार पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि वह हालांकि कई मुद्दों पर अन्ना पक्ष के साथ हैं, लेकिन जनलोकपाल विधेयक को पूरी तरह स्वीकार किए जाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाई जा रही सख्ती के खिलाफ हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से लचीला रुख अपनाने को कहा।
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