Sunday, 11 December 2011

भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते


डरबन। डरबन में जारी जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ [ईयू] के बीच तीखे मतभेद उभरने के बीच ईयू के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने कहा कि विकसित देश भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। लेकिन उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि पर सहमत होने की आवश्यकता है।
ईयू की जलवायु आयुक्त कोनी हेडेगार्ड ने कहा कि हम यह सोच भी नहीं सकते कि हम भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए कहेंगे।
हेडेगार्ड ने कहा कि हम विकास संबंधी भारत के अधिकार को पूरी मान्यता देते हैं। हम इससे पूरी तरह से अवगत हैं कि भारत को विकास संबंधी आवश्यकताओं और ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विश्व में ऐसी संधि होनी चाहिए जिसमें सब के लिए समान कानूनी मूल्य हों।
उन्होंने कहा कि हम भारत को कभी नहीं कहेंगे कि वह विकसित दुनिया के समान ही जिम्मेदारी उठाए। सम्मेलन के दौरान भारत और ईयू के बीच तनाव चरम पर दिखा। इस सम्मेलन में 194 देश जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए विचार विमर्श कर रहे हैं। लेकिन अब तक इसमें कोई समझौता नहीं हो सका है।
सम्मेलन के शुक्रवार को ही समाप्त होना था लेकिन अब इसके रविवार के दोपहर बाद संपन्न होने की संभावना है। शनिवार की शाम तक कई देशों के मंत्री लौट गए थे लेकिन कई प्रमुख देशों के शीर्ष वार्ताकार अब भी मौजूद हैं। इस वार्ता का अहम सवाल यह है कि क्या भारत, चीन और अमेरिका यूरोपीय संघ के खाका को स्वीकार करते हैं या नहीं। इन देशों पर 2015 तक कानूनी रूप से बाध्यकारी एक संधि पर सहमत होने का दबाव है ताकि संधि 2020 तक प्रभावी हो सके। भारत ने अपना रुख व्यक्त करते हुए कहा है कि गरीबी उन्मूलन उसकी प्रमुख वरीयता है।

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