Sunday, 11 December 2011

भारत से अनशन पर अन्ना, लोकपाल पर खुली बहस

अन्ना हजारे लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के खिलाफ आज एक दिन का सांकेतिक अनशन कर रहे हैं। हजारे ने भारत माता की जय, वन्दे मातरम के उद्घोष के साथ अपने अनशन की हुंकार भरी। उनके साथ में मंच पर शांति भूषण, प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, अरविंद गौड़, किरण बेदी और कुमार विश्वास भी हैं। अनशन के दौरान टीम अन्ना लोकपाल के मुद्दे पर खुली बहस करा रही है। बीजेपी से वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सीपीएम की नेता वृंदा करात, सीपीआई के नेता एबी बर्धन और चंद्र बाबू नायडू हिस्सा ले रहे हैं। जेडीयू नेता शरद यादव और समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव मंच पर उपस्थित रहे। कांग्रेस ने इस बहस में भाग लेने से मना कर दिया। इस बहस में बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि देश को एक मजबूत और निष्पक्ष लोकपाल की जरूरत है। स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव दिया है, वह संसद की ओर से किए वादे को तोड़ने वाला है।

उन्होंने कहा कि संसद की भावना के दर्शाने वाले लोकसभा के प्रस्ताव में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, नागरिक आचार संहिता और प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये बातें शामिल नहीं हैं। हम ऐसे लोकपाल को स्वीकार नहीं कर सकते। सीपीएम नेता बृंदा करात और सीपीआई नेता एबी बर्धन ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए। जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत बहस के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।


ससे पहले अनशन के मंच से किरण बेदी ने कहा कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि एजेंसी के विभिन्न राज्यों के हजारों कर्मचारी अधिकारी इसमें आ सकें। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीआई को छोड़ना नहीं चाहती, क्योंकि सीबीआई की अल्मारियां फाइलों से भरी पड़ी हैं। लोकपाल से डर पैदा होगा सुशासन पैदा होगा। सरकारी सेवा जो मेवा बन गई है, फिर सेवा बन जाएगी। बेदी ने कहा कि नेहरू के समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ तंत्र बनाने की बात चल रही है...काश नेहरू जी ‘सिस्टम’ दे जाते। 1962 से 2011 हो गया पर अब जन लोकपाल लाना ही होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों को ‘धोखा’ दिया है और जंतर मंतर पर एकत्र हुए लोग प्रार्थना करेंगे कि सरकार को सद्बुद्धि आए। हजारे ने जंतर-मंतर पर सुबह करीब सवा 10 बजे अपना अनशन शुरू किया। इस मौके पर एकत्रित उनके समर्थक तिरंगा लहराते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे।

हजारे ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए अपने समर्थकों से कहा कि मेरा अनशन शुरू हो गया है। मैं अभी ज्यादा नहीं बोलूंगा। सफेद कुर्ता और टोपी पहने हजारे का उनके समर्थकों ने अनशन सथल पर जोरदार स्वागत किया, जो ठंड की परवाह किए बिना सबुह से ही एकत्र थे। हजारे के साथ टीम अन्ना के अरविन्द केजरीवाल मनीष सिसौदिया, संजय सिंह और कुमार विश्वास जैसे सदस्य भी शामिल हुए। जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले हजारे राजघाट गए और वहां लगभग आधे घंटे तक ध्यान लगाया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं ठीक और स्वस्थ हूं। लोकपाल के मुद्दे पर हजारे का यह तीसरा और जंतर-मंतर पर दूसरा विरोध प्रदर्शन है। उनका पहला विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 5 अप्रैल को शुरू हुआ था और यह पांच दिन चला था। तब सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक संयुक्त समिति बनाई थी, जिसमें आधिकारिक प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल थे। उन्होंने अपना दूसरा अनशन अगस्त में रामलीला मैदान में किया था, जो 13 दिन चला था।

इस मौके पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ममता ने एफडीआई पर सही रुख अपनाया है। उन्हें लोकपाल के मुद्दे पर भी ऐसा ही रुख अपनाना चाहिए। कपिल सिब्बल ने आंदोलन के बाद समूह में भेजे जाने वाले एसएमएस पर रोक लगा दी और अब फेसबुक ट्विटर पर सेंसरशिप की बात कर रहे हैं पर फिर भी वह इस भीड़ को इकट्ठा होने से नहीं रोक पाए। उन्होंने स्थायी समिति पर हमला बोलते हुए कहा कि 30 सदस्यों में दो अनुपस्थित रहे 17 असहमत रहे और एक ने तैयार किया, जिसमें सात कांग्रेस सदस्य और लालू, अमर ने यह रिपोर्ट तैयार की, जिसने लोकपाल को डाकघर बनाकर रख दिया है।

इस मौके पर शांति भूषण ने कहा कि अन्ना ने इतनी बड़ी क्रांति शुरू कर दी है जिसे न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया देख रही है और सरकार की नींद उड़ गई है। आजादी की लड़ाई के लिए जैसे युवा झंडा लिए खड़े थे, वैसे ही आज इकट्ठा हैं। अन्ना दूसरे गांधी हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने लोकपाल को जांच तक

का अधिकार नहीं दिया। यह धोखाधड़ी है, जिसका जवाब अभिषेक मनु सिंघवी को देना होगा। शांति भूषण ने कहा कि जिस दिन दो तीन भ्रष्ट न्यायाधीश जेल चले गए उस दिन न्यायपालिका से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

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