सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर अपर्याप्त है। इसे ध्यान में रखकर विपक्ष को सरकार से सहयोग करना चाहिए ताकि देश में निवेश माहौल सुधर सके। सरकार तेज विकास दर को बनाए रखते हुए महंगाई को थामने के लिए कटिबद्ध है। -प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री
छमाही विश्लेषण
चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9' के बजाय 7.25-7.75' ही रहने का अनुमान चालू वित्त वर्ष की समाप्ति पर महंगाई दर 7 फीसदी के आसपास रहने की आशा किसानों के प्रभावित होने के अंदेशे के बावजूद यूरिया की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की तैयारी यह नौबत क्यों
सरकार का मत, प्रतिकूल ग्लोबल व घरेलू आर्थिक परिदृश्य इसके लिए है जिम्मेदार
घरेलू कारणों में सबसे मुख्य है औद्योगिक उत्पादन की गिरती वृद्धि दर, ग्लोबल कारणों में सबसे मुख्य हैं यूरोप का कर्ज संकट
उम्मीदें भी है बरकरार अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार फिर से तेज हो जाने का पूरा भरोसा है सरकार को
प्रतिकूल ग्लोबल और घरेलू आर्थिक परिदृश्य भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत भारी पड़ा है। दरअसल, सरकार ने इस परिदृश्य को जिम्मेदार ठहराते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास के अनुमान को 9 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार के फिर से तेज हो जाने का भरोसा जताया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किए गए भारतीय अर्थव्यवस्था के छमाही विश्लेषण में इन बातों का जिक्र किया गया है।
छमाही विश्लेषण
चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9' के बजाय 7.25-7.75' ही रहने का अनुमान चालू वित्त वर्ष की समाप्ति पर महंगाई दर 7 फीसदी के आसपास रहने की आशा किसानों के प्रभावित होने के अंदेशे के बावजूद यूरिया की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की तैयारी यह नौबत क्यों
सरकार का मत, प्रतिकूल ग्लोबल व घरेलू आर्थिक परिदृश्य इसके लिए है जिम्मेदार
घरेलू कारणों में सबसे मुख्य है औद्योगिक उत्पादन की गिरती वृद्धि दर, ग्लोबल कारणों में सबसे मुख्य हैं यूरोप का कर्ज संकट
उम्मीदें भी है बरकरार अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार फिर से तेज हो जाने का पूरा भरोसा है सरकार को
प्रतिकूल ग्लोबल और घरेलू आर्थिक परिदृश्य भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत भारी पड़ा है। दरअसल, सरकार ने इस परिदृश्य को जिम्मेदार ठहराते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास के अनुमान को 9 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार के फिर से तेज हो जाने का भरोसा जताया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किए गए भारतीय अर्थव्यवस्था के छमाही विश्लेषण में इन बातों का जिक्र किया गया है।
यह विश्लेषण पेश करते हुए सरकार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9 फीसदी रहने का अनुमान पहले लगाया गया था। हालांकि, अब यह 7.5 फीसदी ही रहने का अनुमान है। यही नहीं, इसमें 0.25 फीसदी की कमी या बढ़ोतरी भी हो सकती है। ऐसे में आर्थिक विकास दर 7.25-7.75 फीसदी भी रह सकती है।
इसमें यह भी बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर महज 7.3 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 8.6 फीसदी थी। आर्थिक विकास दर में कमी के अनुमान का जिक्र करते हुए विश्लेषण में कहा गया है कि धीमे विकास के घरेलू कारणों में औद्योगिक उत्पादन की गिरती वृद्धि दर सबसे मुख्य है। इसी तरह ग्लोबल कारणों में यूरोप का कर्ज संकट और अमेरिका की खस्ता हालत सबसे मुख्य हैं। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि यूरोप अगर फिर से मंदी की चपेट में आ गया तो ग्लोबल इकोनॉमी के साथ-साथ भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
इसके साथ ही सरकार ने यह माना है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.6 फीसदी तक सीमित रखने के लक्ष्य को पाना आसान नहीं है। हालांकि, सरकार ने उम्मीद जताई है कि इसे बहुत ज्यादा बढऩे नहीं दिया जाएगा।
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