Saturday, 10 December 2011

टूजी मामले में चिदंबरम के बचाव में उतरी सरकार


टूजी घोटाला मामले में केंद्र सरकार ने गृह मंत्री चिदंबरम के बचाव में मोर्चा संभाल लिया है। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम की कोई भूमिका नहीं है और भाजपा नीत राजग गठबंधन बेवजह के आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने और संसदीय लोकतंत्र को बाधित करने का प्रयास कर रहा है।

स्पेक्ट्रम आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जा रहा
चिदंबरम का बचाव में उतरते हुए सिब्बल ने घोटालों का ठीकरा तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा पर फोड़ा। विपक्ष पर जवाबी पलटवार करते हुए सिब्बल ने राजा के राजग सरकार की स्पेक्ट्रम नीति को ही अमलीजामा पहनाने की बात कही। इसके साथ ही सरकार ने चिदंबरम के इस्तीफे की विपक्ष की मांग एक बार फिर ठुकरा दी है। सिब्बल ने चिदंबरम को निर्दोष करार देते हुए तमाम तर्क मीडिया के सामने रखे। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन के मसले पर राजा की बतौर वित्त मंत्री चिदंबरम से 8 जनवरी 2008 को कोई मुलाकात ही नहीं हुई थी। यहां तक कि दूरसंचार मंत्रालय की ओर से दस जनवरी, 2008 को जारी आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) की कोई जानकारी वित्त मंत्रालय को नहीं थी। इसलिए वह आशय पत्र और लाइसेंस फीस के संबंध में जवाबदेह नहीं है। खुद राजा ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। इसलिए चिदंबरम को दोषी ठहराना गलत है।

आवंटन से जुड़ी नीति का भी बचाव किया
सिब्बल ने कहा कि वास्तविकता यह है कि वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने ही लाइसेंस प्रवेश शुल्क की समीक्षा का मुद्दा उठाया था, लेकिन दूरसंचार विभाग ने यह सुझाव नहीं माना। विभाग ने कहा कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों को मानते हुए 2003 से चली आ रही आवंटन नीति पर ही चलेगा और करीब 1650 करोड़ रुपये का ही प्रवेश शुल्क रखेगा। संचार मंत्री ने टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी नीति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि आवंटन ट्राई की सिफारिशों के आधार पर किया गया था और अदालतों ने भी किसी तरह के राजस्व के नुकसान की बात नहीं की है। उन्होंने सफाई दी कि नीति सही थी, लेकिनअदालतों में यह मामला चल रहा है कि इसका क्रियान्वयन ठीक ढंग से किया गया था या नहीं।

चिदंबरम-कृष्णा को राहत देने के मूड में नहीं भाजपा
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा को किसी भी तरह का राहत देने के मूड में भाजपा नहीं है। टूजी मामले में चिदंबरम के बचाव में उतरे सिब्बल की दलीलों को खारिज करते हुए भाजपा ने उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल अचानक चिदंबरम के बचाव में क्यों उतर आए हैं।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के असफल प्रयास को देखने के बावजूद सिब्बल अब चिदंबरम को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि टूजी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की जांच कराने की सख्त जरूरत है क्योंकि वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने सरकारी राजस्व को बचाने की कोशिश नहीं की। विदेश मंत्री कृष्णा की इस्तीफे की मांग दोहराते हुए प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से यूपीए सरकार के बड़े मंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरते जा रहे हैं उससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ खड़ा हो गया है।

क्या बोले सिब्बल
-तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने टूजी स्पेक्ट्रम के लिए आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी होने तक चिदंबरम के साथ कोई बैठक नहीं की थी। वित्त मंत्रालय को यह भी जानकारी नहीं थी कि आशय पत्र 10 जनवरी को जारी किए जाने हैं। चिदंबरम-राजा की बैठकें आशय पत्र जारी होने के बाद हुई थीं न कि इससे पहले।
-वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने ही लाइसेंस प्रवेश शुल्क की समीक्षा का मुद्दा उठाया था, लेकिन दूरसंचार विभाग ने यह सुझाव नहीं माना।
-चिदंबरम ने बिना किसी भय या पक्षपात के और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने सरकारी राजस्व को बचाने की कोशिश नहीं की। हमारा मानना है कि टूजी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की जांच कराने की जरूरत है।
रविशंकर प्रसाद, भाजपा प्रवक्ता

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