Sunday, 11 December 2011

जम्मू-कश्मीर के कानून मंत्री सागर के काफिले पर आतंकियों का हमला

श्रीनगर .  कानून, संसदीय मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर पर रविवार देर शाम को आतंकियों ने हमला कर दिया। सागर इस हमले में बाल-बाल बच गए। हमले में एक सुरक्षा कर्मी की मौत हो गई तथा दो पुलिस कर्मियों सहित तीन लोग घायल हुए हैं। जिस समय यह हमला हुआ सागर भतीजी के शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। पिछले छह सालों के दौरान वादी में किसी मंत्री पर यह पहला हमला है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले पर चिंता जताई है।  
 एसएसपी श्रीनगर आशिक बुखारी के अनुसार मंत्री अली मोहम्मद सागर अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने जा रहे थे। जैसे ही उनका काफिला नवां बाजार के शाह मोहल्ला स्थित अपने भाई के घर के पास पहुंचा तो गली में छिपे आतंकियों ने दोनों तरफ से अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दीं। लेकिन जिस कार में सागर बैठे हुए थे वह गोलियों की चपेट में आने से बच गई। जबकि काफिले की एक कार गोलियों से छलनी हो गई। इस कार में बैठे तीन सुरक्षाकर्मी गुलजार अहमद, मोहम्मद याकूब, फिरोज अहमद तथा ड्राइवर अली मोहम्मद गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल ले जाते हुए गुलजार अहमद की मौत हो गई।  एसएसपी के अनुसार मंत्री सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हैं।  
 
 प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही आतंकियों ने गोलियां चलाई वहां अफरातफरी मच गई। जिसका लाभ उठाते हुए आतंकी वहां से भागने में सफल हो गए। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। आतंकियों की तलाश की जा रही है। खबर लिखे जाने तक आतंकियों को पकड़ा नहीं जा सका था और न ही किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है।  
 फिरदौस सिनेमा को जलाने का प्रयास :इस हमले से पहले कुछ उपद्रवियों ने हवल क्षेत्र में स्थित फिरदौस सिनेमा का जलाने का भी प्रयास किया। 

राजधानी के 100 साल पूरे: 1911 में ढहता हुआ शहर था दिल्‍ली

नई दिल्ली. देश की राजधानी बने हुए आज दिल्ली को 100 साल पूरे हो गए। 12 दिसंबर, 1911 को जॉर्ज पंचम का कोरोनेशन पार्क में भारत के नए सम्राट के रूप में राज्याभिषेक (तस्‍वीर में) हुआ था। समारोह के समापन के तुरंत बाद ही जॉर्ज ने इस घोषणा से सबको चौंका दिया, ‘हमने निर्णय किया है कि भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की जाए।’  
 
1911 में दिल्ली एक ढहता हुआ पुराना शहर था। चाहरदीवारी से घिरे शहर के बाहर केवल गांव और कुतुब-निजामुद्दीन की दरगाह के पास कुछ बस्तियां थीं। एडवर्ड लुटियन और हरबर्ट बेकर की देखरेख में 1911 से 1931 के मध्य नई राजधानी ने आकार लिया। लुटियंस और बेकर ने इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन सहित दिल्ली को आधुनिक रूप दिया।   
 
दिल्ली कुल आठ शहरों को मिलाकर बनी है। लेकिन दिल्ली का इतिहास 3000 साल पुराना है। माना जाता है कि पांडवों ने इंद्रप्रस्थ का किला यमुना किनारे बनाया था, लगभग उसी जगह जहां आज मुगल जमाने में बना पुराना किला है। हर शासक ने दिल्ली को राजधानी के तौर पर अलग पहचान दी। कई बार इस शहर पर हमले भी हुए। शासन के बदलने के साथ-साथ, हर सुल्तान ने इलाके के एक हिस्से पर अपना किला बनाया।
 
1899 में शुरू हो गई थीं अदालतें
 
दिल्ली को राजधानी बने सौ साल भले ही आज पूरे हो गए हों, लेकिन यहां ब्रिटिश शासनकाल (वर्ष 1899) से ही आठ अदालतें न्याय मुहैया करा रही थीं। शुरुआत में दिल्ली की ये जिला अदालतें श्रीमती फोर्सटर के घर पर लगती थीं। 1899 में एच अब्दुल रहमान अताउल रहमान बिल्डिंग में कुछ और कमरे किराए पर लिए गए। 1949 में कश्मीरी गेट स्थित पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद 1953 में 22 अधीनस्थ दीवानी अदालतों को 1 स्कीनर्स हाउस स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कालेज की इमारत और कश्मीरी गेट में स्थानांतरित कर दिया गया। यह अदालतें 31 मार्च 1958 तक इन्हीं इमारतों में चलती रहीं। 1926 में दिल्ली के अंदर दो प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट तथा एक द्वितीय श्रेणी अवैतनिक मजिस्ट्रेट कार्यरत थे। 

‘पीएम को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए’




नई दिल्ली:  बीजेपी के नेता अरुण जेटली ने स्टैंडिग कमेटी पर देश से वादा तोड़ने का आरोप लगाया है। भाजपा ने संसद की स्थायी समिति की ओर से लोकपाल विधेयक के संदर्भ में दिए प्रारूप को संसद की भावना के प्रतिकूल बताते हुए रविवार को कहा कि निचले स्तर की नौकरशाही के साथ ही प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे पक्ष की ओर से आयोजित खुली बहस में भाजपा नेता अरूण जेटली ने कहा, ‘देश को एक मजबूत और निष्पक्ष लोकपाल की जरूरत है। स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव दिया है, वह संसद की ओर से किए वादे को तोड़ने वाला है।’

उन्होंने कहा, ‘संसद की भावना के दर्शाने वाले लोकसभा के प्रस्ताव में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, नागरिक आचार संहिता और प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये बातें शामिल नहीं हैं। हम ऐसे लोकपाल को स्वीकार नहीं कर सकते।’

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जेटली ने कहा, ‘संसद ने देश से जो वादा किया था, उसे तोड़ा नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के प्रस्ताव को हम स्वीकार नहीं कर सकते। शासन में रहते हुए ही प्रधानमंत्री इसके दायरे में आने चाहिए।’

जेटली ने कहा, ‘संसद के भीतर और बाहर की बहस में कोई टकराव एवं अंतर्विरोध नहीं है। कानून संसद में बनते हैं, लेकिन जनमत के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है। किसी भी कानून को लेकर संसद में बहस होनी चाहिए, लेकिन जनता क्या चाहती है उस पर भी ध्यान देना होगा।’

स्थायी समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए जेटली ने कहा, ‘‘स्थायी समिति के प्रस्ताव में सिर्फ प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने की बात की गई है, इसे हम स्वीकार नहीं कर सकते। संसद की भावना यह थी कि सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए। हम चाहते हैं कि निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाए।

उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि सीबीआई का दुरुपयोग होता रहा है। सीबीआई को सरकार के नियंत्रण से बाहर लाने की जरूरत है। सीबीआई को एक स्वतंत्र जांच एजेंसी बनाना चाहिए, जिसका प्रासंगिक नियंत्रण लोकपाल के हाथ में हो।’

जेटली ने कहा, ‘पिछले कई वषरे से हम न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात सुन रहे हैं। यह चिंता का विषय है। इसको लेकर भी एक सशख्त कानून बनना चाहिए।’ इस मौके पर भाजपा के सहयोगी अकाली दल के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा, ‘इस मामले पर हम भाजपा के साथ हैं। हम संसद में अन्ना की इच्छाओं के साथ चलेंगे। हम पूरी तरह अन्ना के साथ हैं।’

कोलकाता अग्निकांड : एएमआरआई के खिलाफ प्रदर्शन जारी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में 91 से अधिक लोगों की मौत से गुस्साए लोगों ने रविवार को भी अपना प्रदर्शन जारी रखा। विभिन्न पोस्टर लेकर अस्पताल परिसर में जुटे सैकड़ों लोग अधिकारियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे।



स्थानीय निवासियों ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा 'जबरन छीना' गया अस्पताल के नजदीक का खेल मैदान वापस देने की मांग भी की।



दक्षिणी कोलकाता के ढाकुनिया इलाके पंचाननतला के कुछ निवासी हाथों में पोस्टर लिए हुए थे, जिस पर लिखा था, "अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बल की मदद से जमीन छीन ली। हम चाहते हैं कि वह जमीन जो हमारा खेल मैदान था, हमें वापस दी जाए।"



अस्पताल के नजदीक रहने वाले शम्भू दास ने कहा, "उस जमीन पर उन्होंने एक पार्क बना लिया है जो हमारे लिए थी। वह जमीन कोलकता महानगर विकास प्राधिकरण (केमडीए) की है। अस्पताल प्रबंधन ने वह जमीन जबरन हड़प ली। हम चाहते हैं कि वह जमीन हमें वापस दी जाए, ताकि पहले की तरह हम उसका उपयोग खेल मैदान के रूप में कर सकें।"




एक अन्य पोस्टर में दिखाया गया कि स्थानीय लोग हाथों में कई ट्रॉफियां लिए हुए हैं जो उन्होंने कथित मैदान पर खेलकर जीती थी और वे अधिकारियों पर 2006 में जबरन जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं।




लोगों के प्रदर्शन पर टिप्पणी देने के लिए अस्पताल के अधिकारी सामने नहीं आए।





सोशलिस्ट युनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट (एसयूसीआई-सी) सहित कई राजनीतिक दलों के पोस्टर भी अस्पताल की दीवारों पर चिपके हुए थे जिनमें निजी-सरकारी साझेदारी के तहत बने इस अस्पताल में गलत कार्य करने वालों को कड़ी सजा देने की मांग की गई थी।



उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को अस्पताल के बेसमेंट में आग लगी थी। आग अन्य मंजिलों तक फैल गई और इसकी चपेट में आने से मरीजों और कर्मचारियों सहित 91 लोगों की मौत हो गई। कमरों में धुआं भर जाने पर अधिकांश नर्स, चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारी तो भाग निकले, लेकिन कई गम्भीर मरीज जो बिस्तर से उठ नहीं पाए, उनकी दम घुटने से मौत हो गई।

अन्ना के उपवास को राजनीतिक दलों का मिला समर्थन

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर रविवार को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सांकेतिक उपवास पर बैठे प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का जबर्दस्त समर्थन मिला। उन्होंने अन्ना हजारे को संसद में प्रभावी लोकपाल बनवाने का भरोसा भी दिलाया। वहीं, अन्ना हजारे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के यहां आने से उनके आंदोलन को ताकत मिली है।

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर उपवास शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम' व 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इससे पहले वह राजघाट गए और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित 
की। इस बीच उनके सैकड़ों समर्थक जंतर-मंतर पर पहुंच चुके थे।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी मंच पर पहुंचे और उन्होंने प्रभावी लोकपाल के पक्ष में विचार व्यक्त किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण जेटली और बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने 
प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की।

वहीं, जनता दल (युनाटेड) के शरद यादव ने कहा, "आपके (टीम अन्ना) जनलोकपाल विधेयक में कोई अल्पविराम या पूर्ण विराम भी नहीं बदलना चाहिए।" उनके सम्बोधन के बाद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के 
साथ उनका स्वागत व धन्यवाद किया।

भाजपा नेता जेटली ने संसद की स्थायी समिति की ओर से सौंपी गई लोकपाल रिपोर्ट पर संसद की भावना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे ने जब अपना पिछला अनशन तोड़ा था 
तो उस समय संसद के दोनों सदनों ने अपनी भावना प्रदर्शित की थी, जिसमें राज्यों के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति, सिटिजन चार्टर, निचले स्तर की अफसरशाही को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद की भावना के अनुरूप नहीं है।" उन्होंने कहा, "स्थायी समिति में हमारे दल के जो सदस्य थे, उन्होंने असहमति के नोट के साथ अपने विचार रखे हैं। हमारी राय स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने चाहिए और केवल ग्रुप 'ए' और 'बी' के अधिकारी इसके दायरे में हों और 'सी' और 'डी' ग्रुप के अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाएगा, इसे हम स्वीकार करने वाले नहीं हैं।"

समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि अगस्त में अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार ने जो प्रस्ताव पारित करवाया था कि उससे पीछे हटकर वह संसद के साथ धोखा कर 
रही है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अन्ना हजारे को अपने जनलोकपाल विधेयक के 'प्रत्येक शब्द' को स्वीकार करने के लिए जिद नहीं करनी चाहिए।

वहीं, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के के. येरन ने कहा कि सभी दलों को टीम अन्ना का जनलोकपाल विधेयक स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए 
उन्होंने कहा कि मां-बेटे भ्रष्टाचार से लड़ने को लेकर गम्भीर नहीं हैं।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने कहा कि उनकी पार्टी न केवल सरकार के भीतर, बल्कि निजी क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार से मुकाबले के लिए प्रभावी लोकपाल पक्ष में है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र 
में भ्रष्टाचार से लड़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे स्वतंत्रतापूर्वक राष्ट्रीय सम्पदा 'लूट' रहे हैं। हमें कॉरपोरेट जगत में भ्रष्टाचार पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि वह हालांकि कई मुद्दों पर अन्ना पक्ष के साथ हैं, लेकिन जनलोकपाल विधेयक को पूरी तरह स्वीकार किए जाने को लेकर सामाजिक 
कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाई जा रही सख्ती के खिलाफ हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से लचीला रुख अपनाने को कहा।

भारत से अनशन पर अन्ना, लोकपाल पर खुली बहस

अन्ना हजारे लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के खिलाफ आज एक दिन का सांकेतिक अनशन कर रहे हैं। हजारे ने भारत माता की जय, वन्दे मातरम के उद्घोष के साथ अपने अनशन की हुंकार भरी। उनके साथ में मंच पर शांति भूषण, प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, अरविंद गौड़, किरण बेदी और कुमार विश्वास भी हैं। अनशन के दौरान टीम अन्ना लोकपाल के मुद्दे पर खुली बहस करा रही है। बीजेपी से वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सीपीएम की नेता वृंदा करात, सीपीआई के नेता एबी बर्धन और चंद्र बाबू नायडू हिस्सा ले रहे हैं। जेडीयू नेता शरद यादव और समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव मंच पर उपस्थित रहे। कांग्रेस ने इस बहस में भाग लेने से मना कर दिया। इस बहस में बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि देश को एक मजबूत और निष्पक्ष लोकपाल की जरूरत है। स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव दिया है, वह संसद की ओर से किए वादे को तोड़ने वाला है।

उन्होंने कहा कि संसद की भावना के दर्शाने वाले लोकसभा के प्रस्ताव में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, नागरिक आचार संहिता और प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये बातें शामिल नहीं हैं। हम ऐसे लोकपाल को स्वीकार नहीं कर सकते। सीपीएम नेता बृंदा करात और सीपीआई नेता एबी बर्धन ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए। जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत बहस के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।


ससे पहले अनशन के मंच से किरण बेदी ने कहा कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि एजेंसी के विभिन्न राज्यों के हजारों कर्मचारी अधिकारी इसमें आ सकें। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीआई को छोड़ना नहीं चाहती, क्योंकि सीबीआई की अल्मारियां फाइलों से भरी पड़ी हैं। लोकपाल से डर पैदा होगा सुशासन पैदा होगा। सरकारी सेवा जो मेवा बन गई है, फिर सेवा बन जाएगी। बेदी ने कहा कि नेहरू के समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ तंत्र बनाने की बात चल रही है...काश नेहरू जी ‘सिस्टम’ दे जाते। 1962 से 2011 हो गया पर अब जन लोकपाल लाना ही होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों को ‘धोखा’ दिया है और जंतर मंतर पर एकत्र हुए लोग प्रार्थना करेंगे कि सरकार को सद्बुद्धि आए। हजारे ने जंतर-मंतर पर सुबह करीब सवा 10 बजे अपना अनशन शुरू किया। इस मौके पर एकत्रित उनके समर्थक तिरंगा लहराते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे।

हजारे ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए अपने समर्थकों से कहा कि मेरा अनशन शुरू हो गया है। मैं अभी ज्यादा नहीं बोलूंगा। सफेद कुर्ता और टोपी पहने हजारे का उनके समर्थकों ने अनशन सथल पर जोरदार स्वागत किया, जो ठंड की परवाह किए बिना सबुह से ही एकत्र थे। हजारे के साथ टीम अन्ना के अरविन्द केजरीवाल मनीष सिसौदिया, संजय सिंह और कुमार विश्वास जैसे सदस्य भी शामिल हुए। जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले हजारे राजघाट गए और वहां लगभग आधे घंटे तक ध्यान लगाया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं ठीक और स्वस्थ हूं। लोकपाल के मुद्दे पर हजारे का यह तीसरा और जंतर-मंतर पर दूसरा विरोध प्रदर्शन है। उनका पहला विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 5 अप्रैल को शुरू हुआ था और यह पांच दिन चला था। तब सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक संयुक्त समिति बनाई थी, जिसमें आधिकारिक प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल थे। उन्होंने अपना दूसरा अनशन अगस्त में रामलीला मैदान में किया था, जो 13 दिन चला था।

इस मौके पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ममता ने एफडीआई पर सही रुख अपनाया है। उन्हें लोकपाल के मुद्दे पर भी ऐसा ही रुख अपनाना चाहिए। कपिल सिब्बल ने आंदोलन के बाद समूह में भेजे जाने वाले एसएमएस पर रोक लगा दी और अब फेसबुक ट्विटर पर सेंसरशिप की बात कर रहे हैं पर फिर भी वह इस भीड़ को इकट्ठा होने से नहीं रोक पाए। उन्होंने स्थायी समिति पर हमला बोलते हुए कहा कि 30 सदस्यों में दो अनुपस्थित रहे 17 असहमत रहे और एक ने तैयार किया, जिसमें सात कांग्रेस सदस्य और लालू, अमर ने यह रिपोर्ट तैयार की, जिसने लोकपाल को डाकघर बनाकर रख दिया है।

इस मौके पर शांति भूषण ने कहा कि अन्ना ने इतनी बड़ी क्रांति शुरू कर दी है जिसे न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया देख रही है और सरकार की नींद उड़ गई है। आजादी की लड़ाई के लिए जैसे युवा झंडा लिए खड़े थे, वैसे ही आज इकट्ठा हैं। अन्ना दूसरे गांधी हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने लोकपाल को जांच तक

का अधिकार नहीं दिया। यह धोखाधड़ी है, जिसका जवाब अभिषेक मनु सिंघवी को देना होगा। शांति भूषण ने कहा कि जिस दिन दो तीन भ्रष्ट न्यायाधीश जेल चले गए उस दिन न्यायपालिका से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते


डरबन। डरबन में जारी जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ [ईयू] के बीच तीखे मतभेद उभरने के बीच ईयू के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने कहा कि विकसित देश भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। लेकिन उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि पर सहमत होने की आवश्यकता है।
ईयू की जलवायु आयुक्त कोनी हेडेगार्ड ने कहा कि हम यह सोच भी नहीं सकते कि हम भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए कहेंगे।
हेडेगार्ड ने कहा कि हम विकास संबंधी भारत के अधिकार को पूरी मान्यता देते हैं। हम इससे पूरी तरह से अवगत हैं कि भारत को विकास संबंधी आवश्यकताओं और ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विश्व में ऐसी संधि होनी चाहिए जिसमें सब के लिए समान कानूनी मूल्य हों।
उन्होंने कहा कि हम भारत को कभी नहीं कहेंगे कि वह विकसित दुनिया के समान ही जिम्मेदारी उठाए। सम्मेलन के दौरान भारत और ईयू के बीच तनाव चरम पर दिखा। इस सम्मेलन में 194 देश जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए विचार विमर्श कर रहे हैं। लेकिन अब तक इसमें कोई समझौता नहीं हो सका है।
सम्मेलन के शुक्रवार को ही समाप्त होना था लेकिन अब इसके रविवार के दोपहर बाद संपन्न होने की संभावना है। शनिवार की शाम तक कई देशों के मंत्री लौट गए थे लेकिन कई प्रमुख देशों के शीर्ष वार्ताकार अब भी मौजूद हैं। इस वार्ता का अहम सवाल यह है कि क्या भारत, चीन और अमेरिका यूरोपीय संघ के खाका को स्वीकार करते हैं या नहीं। इन देशों पर 2015 तक कानूनी रूप से बाध्यकारी एक संधि पर सहमत होने का दबाव है ताकि संधि 2020 तक प्रभावी हो सके। भारत ने अपना रुख व्यक्त करते हुए कहा है कि गरीबी उन्मूलन उसकी प्रमुख वरीयता है।

अनशन लाइव: लोकपाल पर खुली बहस शुरू

नई दिल्‍ली. मजबूत लोकपाल की मांग पर अड़े अन्ना हजारे का एक दिन का सांकेतिक अनशन जारी है। जंतर-मंतर स्थित अन्‍ना हजारे के मंच से लोकपाल पर खुली बहस शुरू हो गई है। अरुण जेटली, शरद यादव, ए बी बर्धन, वृंदा करात, राम गोपाल यादव, सुखदेव सिंह ढींढसा मंच पर मौजूद हैं। इस बहस में राजनीतिक नेताओं को लोकपाल पर जनता के सामने अपना पक्ष रखने और लोगों को उनसे सवाल करने का मौका मिलेगा। टीम अन्‍ना ने कांग्रेस को भी इस बहस में शामिल होने का न्‍यौता दिया था लेकिन कांग्रेस ने मना कर दिया।
जंतर-मंतर स्थित मंच पर पहुंचने के बाद अन्‍ना ने सबसे पहले हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। जंतर-मंतर के मंच पर अन्‍ना के साथ चार और लोग अनशन पर बैठे हैं। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, कुमार विश्‍वास और संजय सिंह शामिल हैं। अरविंद केजरीवाल ने  कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया (विस्‍तार से पढ़ने के लिए रिलेटेड लिंक पर क्लिक करें)।  टीम अन्‍ना की सदस्‍य किरण बेदी के अलावा शांति भूषण, प्रशांत भूषण, शमून काजमी और संजय सिंह और मेधा पाटेकर ने भी मंच से लोगों को संबोधित किया।
अन्‍ना हजारे ने देशवासियों से अनशन की अपील की है। उनकी अपील पर दिल्ली से लेकर मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, चंडीगढ़, हैदराबाद, भोपाल, पुणे, अहमदाबाद, बैंगलोर समेत और कई शहरों में अन्ना समर्थकों का धरना जारी है। मुंबई में टैक्सीवालों ने अन्ना के समर्थन में उतरने का ऐलान किया है।
 
'आधे घंटे का मौन-ध्‍यान'  
इससे पहले अन्‍ना हजारे रविवार सुबह महाराष्‍ट्र सदन से सीधे राजघाट पहुंचे। अन्‍ना ने बापू की समाधि पर मत्‍था टेका। अन्‍ना समाधि के समीप करीब आधे घंटे तक मौन-ध्‍यान पर भी बैठे। राजघाट पर अन्‍ना के साथ उनकी टीम के कुछ सदस्य भी मौजूद रहे। जंतर-मंतर पर अन्‍ना समर्थकों का जुटना शुरू हो गया है। 128 लाउड स्‍पीकरों के इंतजाम किए गए हैं। दिल्‍ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। करीब एक हजार कांस्‍टेबल तैनात किए हैं।
अन्‍ना हजारे ने सरकार पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया है। अन्ना ने कहा कि अगर 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 27 दिसंबर से आंदोलन करेंगे। अन्ना ने कहा कि वे 27 दिसंबर से आंदोलन शुरू करेंगे और अगले दो साल यानी लोकसभा चुनाव तक इसे जारी रखेंगे। सरकार के लोकपाल विधेयक के विरोध में अन्ना ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पूरे देश को धोखा दिया गया है। हमें लगता है कि इसके पीछे राहुल गांधी का हाथ है।’  

Saturday, 10 December 2011

लाइव: जंतर-मंतर पर अन्‍ना हजारे का अनशन शुरू



 
नई दिल्‍ली. मजबूत लोकपाल की मांग पर अड़े अन्ना हजारे का एक दिन का सांकेतिक अनशन शुरू हो गया है। जंतर-मंतर स्थित मंच पर पहुंचने के बाद उन्‍होंने सबसे पहले हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। जंतर-मंतर पर अन्‍ना के साथ चार और लोग अनशन पर बैठे हैं। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, कुमार विश्‍वास और संजय सिंह शामिल हैं। टीम अन्‍ना की सदस्‍य किरण बेदी के अलावा शमून काजमी और संजय सिंह ने मंच से लोगों को संबोधित किया। टीम के अन्‍य सदस्‍य कुमार विश्‍वास मंच संचालन कर रहे हैं।
अन्‍ना हजारे ने देशवासियों से अनशन की अपील की है। दिल्ली समेत 45 शहरों में अन्ना समर्थक सांकेतिक अनशन पर बैठेंगे। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, चंडीगढ़, हैदराबाद, भोपाल, पुणे, अहमदाबाद, बैंगलोर समेत और कई शहरों में अन्ना समर्थकों का धरना सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगा। मुंबई में टैक्सीवालों ने अन्ना के समर्थन में उतरने का ऐलान किया है।
इससे पहले अन्‍ना हजारे रविवार सुबह महाराष्‍ट्र सदन से सीधे राजघाट पहुंचे। अन्‍ना ने बापू की समाधि पर मत्‍था टेका। अन्‍ना समाधि के समीप करीब आधे घंटे तक मौन-ध्‍यान पर भी बैठे। राजघाट पर अन्‍ना के साथ उनकी टीम के कुछ सदस्य भी मौजूद रहे। जंतर-मंतर पर अन्‍ना समर्थकों का जुटना शुरू हो गया है। 128 लाउड स्‍पीकरों के इंतजाम किए गए हैं। दिल्‍ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। करीब एक हजार कांस्‍टेबल तैनात किए हैं।
अन्‍ना हजारे ने सरकार पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया है। अन्ना ने कहा कि अगर 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 27 दिसंबर से आंदोलन करेंगे। अन्ना ने कहा कि वे 27 दिसंबर से आंदोलन शुरू करेंगे और अगले दो साल यानी लोकसभा चुनाव तक इसे जारी रखेंगे। सरकार के लोकपाल विधेयक के विरोध में अन्ना ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पूरे देश को धोखा दिया गया है। हमें लगता है कि इसके पीछे राहुल गांधी का हाथ है।’ 
आप भी नेताओं से पूछिए लोकपाल पर सवाल
टीम अन्ना ने रविवार को अन्ना के अनशन के दौरान लोकपाल पर बहस के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों को न्यौता भेजा है। इस बहस में राजनीतिक नेताओं को लोकपाल पर जनता के सामने अपना पक्ष रखने और लोगों को उनसे सवाल करने का मौका मिलेगा।

टीम अन्‍ना के सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने बताया कि भाजपा से अरुण जेटली, सपा से राम गोपाल यादव, सीपीआई से ए बी बर्द्धन, माकपा से वृंदा करात, जद(यू) से शरद यादव, बीजद से पिनाकी मिश्रा और टीडीपी से चंद्र बाबू नायडू इस बहस में हिस्‍सा लेंगे। जबकि कांग्रेस और इसकी अगुवाई में केंद्र की यूपीए सरकार में सहयोगी दलों का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं रहेगा। यह बहस दोपहर डेढ़ बजे से शाम पांच बजे तक चलेगी

लाइव: जंतर-मंतर पर अन्‍ना हजारे का अनशन शुरू



 
नई दिल्‍ली. मजबूत लोकपाल की मांग पर अड़े अन्ना हजारे का एक दिन का सांकेतिक अनशन शुरू हो गया है। जंतर-मंतर स्थित मंच पर पहुंचने के बाद उन्‍होंने सबसे पहले हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। जंतर-मंतर पर अन्‍ना के साथ चार और लोग अनशन पर बैठे हैं। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, कुमार विश्‍वास और संजय सिंह शामिल हैं। टीम अन्‍ना की सदस्‍य किरण बेदी के अलावा शमून काजमी और संजय सिंह ने मंच से लोगों को संबोधित किया। टीम के अन्‍य सदस्‍य कुमार विश्‍वास मंच संचालन कर रहे हैं।
अन्‍ना हजारे ने देशवासियों से अनशन की अपील की है। दिल्ली समेत 45 शहरों में अन्ना समर्थक सांकेतिक अनशन पर बैठेंगे। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, चंडीगढ़, हैदराबाद, भोपाल, पुणे, अहमदाबाद, बैंगलोर समेत और कई शहरों में अन्ना समर्थकों का धरना सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगा। मुंबई में टैक्सीवालों ने अन्ना के समर्थन में उतरने का ऐलान किया है।
इससे पहले अन्‍ना हजारे रविवार सुबह महाराष्‍ट्र सदन से सीधे राजघाट पहुंचे। अन्‍ना ने बापू की समाधि पर मत्‍था टेका। अन्‍ना समाधि के समीप करीब आधे घंटे तक मौन-ध्‍यान पर भी बैठे। राजघाट पर अन्‍ना के साथ उनकी टीम के कुछ सदस्य भी मौजूद रहे। जंतर-मंतर पर अन्‍ना समर्थकों का जुटना शुरू हो गया है। 128 लाउड स्‍पीकरों के इंतजाम किए गए हैं। दिल्‍ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। करीब एक हजार कांस्‍टेबल तैनात किए हैं।
अन्‍ना हजारे ने सरकार पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया है। अन्ना ने कहा कि अगर 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 27 दिसंबर से आंदोलन करेंगे। अन्ना ने कहा कि वे 27 दिसंबर से आंदोलन शुरू करेंगे और अगले दो साल यानी लोकसभा चुनाव तक इसे जारी रखेंगे। सरकार के लोकपाल विधेयक के विरोध में अन्ना ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पूरे देश को धोखा दिया गया है। हमें लगता है कि इसके पीछे राहुल गांधी का हाथ है।’ 
आप भी नेताओं से पूछिए लोकपाल पर सवाल
टीम अन्ना ने रविवार को अन्ना के अनशन के दौरान लोकपाल पर बहस के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों को न्यौता भेजा है। इस बहस में राजनीतिक नेताओं को लोकपाल पर जनता के सामने अपना पक्ष रखने और लोगों को उनसे सवाल करने का मौका मिलेगा।

टीम अन्‍ना के सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने बताया कि भाजपा से अरुण जेटली, सपा से राम गोपाल यादव, सीपीआई से ए बी बर्द्धन, माकपा से वृंदा करात, जद(यू) से शरद यादव, बीजद से पिनाकी मिश्रा और टीडीपी से चंद्र बाबू नायडू इस बहस में हिस्‍सा लेंगे। जबकि कांग्रेस और इसकी अगुवाई में केंद्र की यूपीए सरकार में सहयोगी दलों का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं रहेगा। यह बहस दोपहर डेढ़ बजे से शाम पांच बजे तक चलेगी

Tense year-end for UPA as Anna Hazare revives stir

NEW DELHI: This year belied Congress's hope that the powerful performance in the 2009 Lok Sabha elections would ensure a smooth five-year stint at the Centre. Now, it seems that the year, marked by upheavals, may end on a turbulent note as well. The party's bugbear and anti-graft campaigner Anna Hazare announced on Saturday that he will begin the third phase of his agitation for setting up a strong Lokpal on December 27, even as he dragged Congressgeneral secretary Rahul Gandhi into the line of his anti-corruption fire.

Talking to reporters here on the eve of his symbolic one-day fast on Sunday against the "weak" draft of the Lokpal Bill that was submitted in Parliament on Friday, Anna blamed Rahul for what he called the diluted legislation and said that he would continue his campaign until the 2014 Lok Sabha polls.

The challenge may ensure that the government's crisis managers may have to be on their toes when they would have looked for a year-end break.

Alleging that the Lokpal committee had chosen to ignore assurances given by the PM, Hazare the activist said that this could not have been done without Rahul's backing. However, he sparedSonia Gandhi, noting that she Congress chief was unwell and he did not wish to aggravate her illness. He even called her "leader of nation".

"They have cheated the whole country. The PM had given in writing that these three issues would be brought under the Lokpal bill...The PM's letter was thrown into the dustbin. Why this volte face? Is (standing committee chairman Abhishek Manu Singhvi) Singhvi's post higher than that of the PM?''

Anna, who was talking to reporters just hours after reaching here, added, "Obviously, there is somebody behind it? .. Who is bigger than the PM?... we suspect Rahul Gandhi could be behind this... Who else can dare to challenge the PM? That is why there are these problems."

The veteran campaigner spared Sonia Gandhi, noting that the Congress chief was unwell and he did not wish to aggravate her illness. He even called her "leader of nation".

This was the second time when Anna targeted Rahul and pointed to a possible game plan to go after the Congress general secretary whom the party has assiduously tried to keep firewalled from controversial issues, less the freshness and novelty associated his brand gets sullied. It also marked an escalation of confrontation between Team Anna and Congress. Anna repeated that he would campaign against Congress in the coming state polls and seemed unfazed by the allegation that he had an agenda against the ruling party.

सरकार ने विकास अनुमान घटाकर किया 7.5%


सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर अपर्याप्त है। इसे ध्यान में रखकर विपक्ष को सरकार से सहयोग करना चाहिए ताकि देश में निवेश माहौल सुधर सके। सरकार तेज विकास दर को बनाए रखते हुए महंगाई को थामने के लिए कटिबद्ध है।  -प्रणब मुखर्जी  वित्त मंत्री 

छमाही विश्लेषण
चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9' के बजाय 7.25-7.75' ही रहने का अनुमान चालू वित्त वर्ष की समाप्ति पर महंगाई दर 7 फीसदी के आसपास रहने की आशा किसानों के प्रभावित होने के अंदेशे के बावजूद यूरिया की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की तैयारी यह नौबत क्यों
सरकार का मत, प्रतिकूल ग्लोबल व घरेलू आर्थिक परिदृश्य इसके लिए है जिम्मेदार
घरेलू कारणों में सबसे मुख्य है औद्योगिक उत्पादन की गिरती वृद्धि दर, ग्लोबल कारणों में सबसे मुख्य हैं यूरोप का कर्ज संकट  
उम्मीदें भी है बरकरार अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार फिर से तेज हो जाने का पूरा भरोसा है सरकार को

प्रतिकूल ग्लोबल और घरेलू आर्थिक परिदृश्य भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत भारी पड़ा है। दरअसल, सरकार ने इस परिदृश्य को जिम्मेदार ठहराते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास के अनुमान को 9 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने अगले साल आर्थिक विकास की रफ्तार के फिर से तेज हो जाने का भरोसा जताया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किए गए भारतीय अर्थव्यवस्था के छमाही विश्लेषण में इन बातों का जिक्र किया गया है।


यह विश्लेषण पेश करते हुए सरकार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9 फीसदी रहने का अनुमान पहले लगाया गया था। हालांकि, अब यह 7.5 फीसदी ही रहने का अनुमान है। यही नहीं, इसमें 0.25 फीसदी की कमी या बढ़ोतरी भी हो सकती है। ऐसे में आर्थिक विकास दर 7.25-7.75 फीसदी भी रह सकती है।

इसमें यह भी बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर महज 7.3 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 8.6 फीसदी थी। आर्थिक विकास दर में कमी के अनुमान का जिक्र करते हुए विश्लेषण में कहा गया है कि धीमे विकास के घरेलू कारणों में औद्योगिक उत्पादन की गिरती वृद्धि दर सबसे मुख्य है। इसी तरह ग्लोबल कारणों में यूरोप का कर्ज संकट और अमेरिका की खस्ता हालत सबसे मुख्य हैं। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि यूरोप अगर फिर से मंदी की चपेट में आ गया तो ग्लोबल इकोनॉमी के साथ-साथ भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।


इसके साथ ही सरकार ने यह माना है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.6 फीसदी तक सीमित रखने के लक्ष्य को पाना आसान नहीं है। हालांकि, सरकार ने उम्मीद जताई है कि इसे बहुत ज्यादा बढऩे नहीं दिया जाएगा।

आईआईटी के 439 छात्रों को मिली नौकरी

कानपुर। आईआईटी में जश्न जारी है। संस्थान में कुछ दिन पहले शुरू हुए कैंपस प्लेसमेंट में 439 छात्र-छात्राएं पांच लाख से 70 लाख रुपये सालाना का वेतन पैकेज झटक चुके हैं जबकि 506 स्टूडेंट अभी कतार में हैं। पहली बार इतने बड़े पैकेज पर स्टूडेंट्स के चुने जाने से उत्साहित संस्थान के निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे ने बताया कि जश्न का सिलसिला 31 मई तक जारी रहेगा। प्लेसमेंट के लिए 100 कंपनियां यहां पहुंच चुकी है जबकि 50 अन्य कंपनियां भी आने वाली हैं। प्लेसमेंट के लिए 989 स्टूडेंट ने इनरोलमेंट कराया था।

पॉकेट जेम्स का पैकेज सबसे अधिक 
प्रो. धांडे ने बताया कि अबकी बार अमेरिका की पॉकेट जेम्स कंपनी का पैकेज सबसे बढ़िया रहा है। दूसरे नंबर पर फेसबुक और तीसरे पर रिओ टिनटो कंपनी रही। इन कंपनियों ने 45 से 70 लाख के सालाना पैकेज आफर किये हैं। कुछ कंपनियों के पैकेज 30 लाख तो कुछ के पांच से 15 लाख के बीच हैं। इनमें 10 से 15 फीसदी स्टूडेंट विदेश जाएंगे।

इनको मिली जॉब
बीटेक : 158
डुअल डिग्री : 98
एमटेक : 122
एमएससीआई : 25
एमएससी-2 : 8
एमबीए : 21
एमडीईएस : 7

डुअल डिग्री वालों की बल्ले-बल्ले
प्लेसमेंट में आईं कंपनियों ने डुअल डिग्री वाले स्टूडेंट्स को ज्यादा पसंद किया है। डुअल डिग्री के 132 में 98 छात्र-छात्राओं को बढ़िया पैकेज मिला है। इस बार सर्विस और फाइनेंस सेक्टर के साथ सॉफ्टवेयर कंपनियों ने भी बढ़िया पैकेज दिए हैं जबकि इंजीनियरिंग सेक्टर की कंपनियां कम रहीं। इलेक्ट्रिकल, केमिकल और मैकेनिकल ब्रांच के छात्रों को सर्विस सेक्टर में ज्यादा ऑफर मिले हैं। एफएमसीजी के पैकेज भी कम रहे।

टूजी मामले में चिदंबरम के बचाव में उतरी सरकार


टूजी घोटाला मामले में केंद्र सरकार ने गृह मंत्री चिदंबरम के बचाव में मोर्चा संभाल लिया है। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम की कोई भूमिका नहीं है और भाजपा नीत राजग गठबंधन बेवजह के आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने और संसदीय लोकतंत्र को बाधित करने का प्रयास कर रहा है।

स्पेक्ट्रम आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जा रहा
चिदंबरम का बचाव में उतरते हुए सिब्बल ने घोटालों का ठीकरा तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा पर फोड़ा। विपक्ष पर जवाबी पलटवार करते हुए सिब्बल ने राजा के राजग सरकार की स्पेक्ट्रम नीति को ही अमलीजामा पहनाने की बात कही। इसके साथ ही सरकार ने चिदंबरम के इस्तीफे की विपक्ष की मांग एक बार फिर ठुकरा दी है। सिब्बल ने चिदंबरम को निर्दोष करार देते हुए तमाम तर्क मीडिया के सामने रखे। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन के मसले पर राजा की बतौर वित्त मंत्री चिदंबरम से 8 जनवरी 2008 को कोई मुलाकात ही नहीं हुई थी। यहां तक कि दूरसंचार मंत्रालय की ओर से दस जनवरी, 2008 को जारी आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) की कोई जानकारी वित्त मंत्रालय को नहीं थी। इसलिए वह आशय पत्र और लाइसेंस फीस के संबंध में जवाबदेह नहीं है। खुद राजा ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। इसलिए चिदंबरम को दोषी ठहराना गलत है।

आवंटन से जुड़ी नीति का भी बचाव किया
सिब्बल ने कहा कि वास्तविकता यह है कि वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने ही लाइसेंस प्रवेश शुल्क की समीक्षा का मुद्दा उठाया था, लेकिन दूरसंचार विभाग ने यह सुझाव नहीं माना। विभाग ने कहा कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों को मानते हुए 2003 से चली आ रही आवंटन नीति पर ही चलेगा और करीब 1650 करोड़ रुपये का ही प्रवेश शुल्क रखेगा। संचार मंत्री ने टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी नीति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि आवंटन ट्राई की सिफारिशों के आधार पर किया गया था और अदालतों ने भी किसी तरह के राजस्व के नुकसान की बात नहीं की है। उन्होंने सफाई दी कि नीति सही थी, लेकिनअदालतों में यह मामला चल रहा है कि इसका क्रियान्वयन ठीक ढंग से किया गया था या नहीं।

चिदंबरम-कृष्णा को राहत देने के मूड में नहीं भाजपा
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा को किसी भी तरह का राहत देने के मूड में भाजपा नहीं है। टूजी मामले में चिदंबरम के बचाव में उतरे सिब्बल की दलीलों को खारिज करते हुए भाजपा ने उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल अचानक चिदंबरम के बचाव में क्यों उतर आए हैं।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के असफल प्रयास को देखने के बावजूद सिब्बल अब चिदंबरम को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि टूजी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की जांच कराने की सख्त जरूरत है क्योंकि वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने सरकारी राजस्व को बचाने की कोशिश नहीं की। विदेश मंत्री कृष्णा की इस्तीफे की मांग दोहराते हुए प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से यूपीए सरकार के बड़े मंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरते जा रहे हैं उससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ खड़ा हो गया है।

क्या बोले सिब्बल
-तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने टूजी स्पेक्ट्रम के लिए आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी होने तक चिदंबरम के साथ कोई बैठक नहीं की थी। वित्त मंत्रालय को यह भी जानकारी नहीं थी कि आशय पत्र 10 जनवरी को जारी किए जाने हैं। चिदंबरम-राजा की बैठकें आशय पत्र जारी होने के बाद हुई थीं न कि इससे पहले।
-वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने ही लाइसेंस प्रवेश शुल्क की समीक्षा का मुद्दा उठाया था, लेकिन दूरसंचार विभाग ने यह सुझाव नहीं माना।
-चिदंबरम ने बिना किसी भय या पक्षपात के और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने सरकारी राजस्व को बचाने की कोशिश नहीं की। हमारा मानना है कि टूजी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की जांच कराने की जरूरत है।
रविशंकर प्रसाद, भाजपा प्रवक्ता

स्वामी के लेख से क्षुब्ध हावर्ड ने उनका पाठ्यक्रम हटाया



 
न्यूयॉर्क. अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने भारत में इस्लामिक आतंकवाद पर जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी के एक लेख को निन्दनीय और हिकारत भरा बताते हुए विश्वविद्यालय के पाठच्यक्रम से उन दो पाठ्यक्रमों को हटा दिया है जिन्हें श्री स्वामी पढ़ाते थे।

हार्वर्ड के कला एवं विज्ञान संकाय के फैकल्टी सदस्यों की बैठक में स्वामी द्वारा हार्वर्ड के तीन माह के ग्रीष्मकालीन सत्न में पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रमों क्वांटिटेटिव मेथड्स इन इकोनोमिक्स ऐंड बिजनेस और इकोनामिक्स डेवलपमेंट इन इंडिया ऐंड ईस्ट एशिया को हटाने के लिए बड़े बहुमत के साथ वोट दिया।

हार्वर्ड क्रिम्सन ने बताया कि वर्ष 2012 के ग्रीष्मकालीन पाठ्य क्रम की सूची को मंजूरी देने के लिए संकाय की बैठक बुलायी गयी थी। बैठक में उस समय गरमा-गरम बहस शुरू हो गयी जब तुलनात्मक धर्म की प्रोफेसर डायना एक्क ने डा. स्वामी के पाठ्यक्रम को सूची से निकालने के लिए संशोधन का प्रस्ताव रखा।

डॉ. स्वामी ने भारत में लिखे अपने विवादास्पद लेख में कहा था कि सैकड़ों मस्जिदों को ढहा देना चाहिए तथा भारत में उन्हीं मुसलमानों को मताधिकार दिया जाना चाहिए जो यह स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज हिंदू थे।

एक्क ने कहा कि स्वामी ने एक समूचे धार्मिक समुदाय के लिए घृणा फैलाने में सारी हदें पार कर दी हैं और उनके पवित्न स्थलों के लिए हिंसा भड़काने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हार्वर्ड की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति के साथ जुड़ाव न रखे जो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ घृणा व्यक्त करता हो।

उन्होंने कहा कि अलोकप्रिय और स्वागत योग्य न होने वाले राजनीतिक विचारों में फर्क है।

इससे पहले हार्वर्ड ने अभियव्यक्ति की स्वतंत्नता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए डॉ. स्वामी का पक्ष लिया था लेकिन 400 से भी ज्यादा विद्यार्थियों ने भारतीय नेता को हटाने के लिए हस्ताक्षरित याचिका दी थी।
 

ड्रैगन सिर्फ अपनी सोचता है

‘आप भारत के बारे में क्या सोचते हैं’- मैंने बीजिंग की उस सर्द शाम एक चीनी राजनयिक से पूछा। जवाब चौंकाने वाला था- ‘भारत के लोग बहुत चालाक हैं और वे गणित में बहुत अच्छे होते हैं।’ उत्तर संक्षिप्त और बहुअर्थी था। ‘चालाक’ और ‘गणित में तेज।’ दोनों को अलग-अलग और फिर मिलाकर आंकिए, किसी कंप्यूटर फाइल की तरह तमाम अर्थ खुलते नजर आएंगे।
मेरा अगला सवाल था- ‘चीन तो बहुत आगे निकल गया है, पर आप कौन-से ऐसे क्षेत्र पाते हैं, जहां भारत अगुवा साबित होता है?’ इस बार भी उत्तर नपा-तुला और सारगर्भित था- ‘अफ्रीका। वहां आप लोगों ने बहुत पहले से काम शुरू कर दिया है। हमें उसकी बराबरी करने में बहुत समय लगेगा।’ मैंने कुछ क्षणों में जो जोड़ा-घटाया, उसकी ध्वनियां साफ थीं। चीन भारत को अपना प्रतिस्पद्र्धी मानता है। ड्रैगन दुनिया में अपनी ताकत और बढ़ाना चाहता है, इसमें वह अफ्रीका महाद्वीप में भारत को अपने से आगे पाता है, जो उसे स्वीकार्य नहीं है। आम चीनी नागरिकों के बीच हिन्दुस्तानियों की छवि चालाक, धूर्त और कई समीकरणों को एक साथ साधने में माहिर लोगों की बना दी गई है।
गौर कीजिए। ऐसी ही छवि भारत में चीनी नागरिकों के लिए है। हम मानते हैं कि इस महादेश ने ‘चीनी-हिंदी भाई-भाई’ के नेह भरे रिश्ते की पीठ में खंजर घोंपा था। आज भी भारत की लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर लाल सेना ने कब्जा जमा रखा है और अक्सर उसके सैनिक हमारी सीमा का अतिक्रमण करते रहते हैं। मुलाकात बहुत छोटी थी, इसलिए ज्यादा नहीं पूछ पाया, लेकिन मन में सवाल उठा कि पिछले लगभग पांच दशकों में दोनों देशों की जनता के बीच अविश्वास के गहरे बीज बो दिए गए हैं, उन्हें दूर किए बिना भला हमारे रिश्ते सामान्य कैसे हो सकते हैं?
उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान को ले लीजिए। इस देश से भारत तीन बार जंग लड़ चुका है (मैं यहां जान-बूझकर कारगिल को नहीं गिन रहा), फिर भी सीमाओं के दोनों ओर लोगों के दिलों की धड़कनें मिलती हैं। इसकी वजह यही है कि तमाम खून-खराबे के बावजूद हमारा रोटी और बेटी का रिश्ता बना हुआ है। उभरती हुई टेनिस स्टार सानिया मिर्जा अगर एक पाकिस्तानी क्रिकेटर से शादी कर लेती हैं, तो दोनों तरफ जश्न मनाया जाता है। चीन के साथ ऐसा नहीं है। दुरूह सीमाओं ने दोनों देशों के अवाम को दूर रखा है।
दलाई लामा की मानें, तो भारत और चीन की तो सीमा ही नहीं मिलती। बीच में तिब्बत पड़ता है, जिस पर बीजिंग की फौजों ने कब्जा जमा रखा है। दलाई लामा कहते हैं कि तिब्बत की आजादी जरूरी है। भारतीय भूमि की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि भारत और चीन के बीच में यह ‘बफर स्टेट’ बना रहे। वह सही हो सकते हैं, पर उनका संघर्ष क्या बुढ़ा नहीं चला है? इस आध्यात्मिक गुरु और शासक को जूझते-जूझते 52 साल हो गए।
चीनियों की तरह भारत में भी कुछ लोगों का मानना है, दलाई लामा और उनके अनुयायी दोनों देशों के बीच गर्मजोशी कायम करने में एक बाधा हैं। इस बार भी चीन ने उनकी आड़ ली है। नई दिल्ली में एक बौद्ध सम्मेलन क्या आयोजित हुआ कि बीजिंग ने नजरें ही टेढ़ी कर लीं। आनन-फानन में वहां के खुदमुख्तारों ने द्विपक्षीय बातचीत रद्द कर दी। उन्हें ऐतराज था कि दलाई लामा के साथ इस सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शिरकत करने वाले हैं। इस ऐतराज के बाद प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और डॉ. मनमोहन सिंह समारोह में नहीं गए। सवाल उठता है कि हम कब तक बीजिंग की इस शतरंजी चाल में फंसते रहेंगे?
पिछले साल जब दलाई लामा को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलना था, तब भी चीन ने कई गीदड़ भभकियां दी थीं, पर ओबामा अडिग रहे। संसार का सबसे ताकतवर लोकतंत्र अगर इस तरह सोचता है, तो सबसे बड़ी जम्हूरियत को भी अपनी शक्ति का एहसास होना चाहिए। अब हिन्दुस्तान उन देशों की श्रेणी में नहीं आता, जिन्हें ऐरा-गैरा, नत्थू-खैरा मानकर ताकतवर देश आगे बढ़ जाया करते थे। शायद यही वजह है कि कुछ खींचातानी के बाद चीन के वार्ताकार दिल्ली आए और फैसला हुआ कि गुत्थियां सुलझाने के लिए हम पहले की तरह मिलते रहेंगे। बीजिंग शायद इसलिए भी दबाव महसूस कर रहा है कि भारत अमेरिका और जापान के साथ एक बातचीत में हिस्सा लेने जा रहा है, जिसका मकसद ड्रैगन की फुंफकारों पर काबू पाना है।
बीजिंग में मिले उस चीनी राजनयिक की बातों की ही तरह ड्रैगन की कलाबाजियां बड़ी रहस्यमय हैं। वहां के कूटनीतिज्ञ कार्बन उत्सजर्न, पर्यावरण नियमों और बाजार की व्यवस्थाओं को लेकर अक्सर भारत के साथ चलने की बात करते हैं। ये वे मुद्दे हैं, जिनमें चीन का भला है। पर जब भी दोनों देशों की द्विपक्षीय बात आती है, चीनियों के सुर बदल जाते हैं। हम बड़े अफसोस के साथ याद कर सकते हैं। अरुणाचल को तो यह देश अपना हिस्सा बताता ही रहा है, पर पिछले दिनों कश्मीर के लोगों के लिए वीजा संबंधी नए नियम बनाकर चीनियों ने साबित कर दिया था कि वे भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। पूर्वोत्तर के अलगाववादी गुटों से उनकी सहानुभूति पहले से रही है। अब वे भारत को दोतरफा लड़ाई की आग में झोकने की कोशिश कर रहे हैं।
यही नहीं, दक्षिण चीन सागर में जब भारत ने वियतनाम के साथ मिलकर तेल खोदने की जुगत शुरू की, तो चीनी नौसेना ने हमारे पोत को धमकी दी। हमेशा की तरह बाद में कूटनतिज्ञों ने इसे ‘बेबुनियाद’ करार दिया, पर यह सच है कि चीन नहीं चाहता कि उसके पड़ोसियों से भारत कोई भी रिश्ता बनाए। इसके विपरीत आतंकवादियों के आगे बेबस पाकिस्तान की सरकार को समर्थन देकर उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उसकी रुचि हर उस चीज में है, जो नई दिल्ली को परेशान कर सकती है। यही नहीं, नेपाल, म्यांमार, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका में चीन अपनी पकड़ बढ़ाता जा रहा है। मतलब साफ है, उसे हिंद महासागर में अपनी दखल बढ़ानी है, जो हर लिहाज से हमारे सामरिक हितों के प्रतिकूल है।
सवाल उठता है कि ऐसे में भारत क्या करे? चीन की पैदा की हुई समस्याओं के कई समाधान हो सकते हैं। नरसिंह राव ने ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ बनाई थी। इसके तहत हमें म्यांमार से लेकर वियतनाम और दक्षिण कोरिया से अपनी साझेदारी मजबूत करनी थी। राव के बाद यह काम कुछ ढीला पड़ गया। मौजूदा सरकार ने इसे थोड़ा-सा बढ़ाया है। इसे और गति देने की जरूरत है। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया के साथ भी हमें अपनी नई पहचान कायम करनी है। ऑस्ट्रेलिया और चीन पिछले दशकों में एक-दूसरे के प्रबल व्यावसायिक पार्टनर बन गए हैं।
इधर अमेरिका ने ऑस्ट्रेलियाइयों के साथ मिलकर ‘हिंद-प्रशांत’ रीति-नीति को गढ़ना शुरू किया है। भारत को भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इससे चीन को लगेगा कि भारत उसकी उम्मीदों से कहीं अधिक बलवान है और वह बातचीत की टेबल पर अपने तेवर नर्म करने को मजबूर हो जाएगा।
कुछ और भी संकेत हैं, जो अपशकुनों की ओर इशारा करते हैं। पेंटागन में वितरित एक रिपोर्ट बताती है कि चीन के पास तीन हजार परमाणु हथियार हैं, जबकि भारत के पास कुल सौ। यह असंतुलन घातक है। उम्मीद है, कूटनीतिक स्तर पर हमारे सत्तानायक इन शतरंजी चालों का जवाब दे रहे होंगे। पश्चिम से कुछ आशाजनक संकेत मिले हैं, पर अभी बहुत काम किया जाना शेष है।

डरबन में भारत ने दिखाया दुनिया को आईना

 डरबन में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत ने जोर देकर कहा है कि जलवायु से जुड़ी वार्ताओं का केंद्र समानता होना चाहिए। भारत ने शनिवार को ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए ज्यादा कुछ न करने के लिए विकसित देशों की आलोचना भी की। उसने सम्मेलन में मौजूद देशों से भावुक अपील की, जिसमें उसके 1 अरब 20 करोड़ लोगों के आधारभूत विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए मदद की मांग की गई। 

आलोचनाओं के बीच सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री जयंती नटराजन ने 194 देशों से आए प्रतिनिधियों से कहा कि भारत वार्ता की राह में रुकावट नहीं पैदा कर रहा है। उसकी कानूनी पर तौर पर बाध्यकारी संधि पर सहमत न होने के लिए आलोचना की जा रही है। यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने एक संधि की पेशकश की है, जो कि कानूनी तौर पर बाध्यकारी है। अमेरिका और चीन समेत भारत पर इस पर हस्ताक्षर करने का दबाव है। प्रस्तावित संधि पर 2015 तक हस्ताक्षर होने हैं और यह 2020 में लागू होगी। 

नटराजन ने कहा, 'मैं कनाडा से आए साथी की टिप्पणियां सुनकर हैरान और परेशान हूं। वह हमारी तरफ इशारा कर रहे हैं कि हम इस रोडमैप के खिलाफ क्यों हैं? मैं यह जानकर परेशान हूं कि महज 14 साल पहले की गई एक कानूनी तौर पर बाध्यकारी संधि को अब नकारा जा रहा है। जिन देशों ने इस पर हस्ताक्षर किया था और इसे मंजूर किया था, अब वे बगैर किसी शिष्टाचार के इससे पीछे हट रहे हैं। बावजूद इसके दूसरों की तरफ उंगली उठा रहे हैं।' नटराजन के कड़े शब्दों का तालियों के साथ स्वागत किया गया। उन्होंने बाद में कहा कि यह तथ्यात्मक, भावनात्मक बयान है। 

सदाबहार अभिनेता देव आनंद पंचतत्व में विलीन


लंदन/मुंबई/अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी।
Story Update : Sunday, December 11, 2011    1:33 AM
Evergreen actor Dev Anand goes up in flames
छह दशकों से भी अधिक समय तक लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सदाबहार अभिनेता देव आनंद शनिवार को यहां पंचतत्व में विलीन हो गए। परिवार और कुछ करीबी लोगों के बीच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े पांच यहां के प्यूटनी वेल शवदाह गृह में देव साहब का पूरे हिंदु रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं और गाता रहे मेरा दिल जैसे उनकी फिल्मों के कुछ सुप्रसिद्ध गीतों के बीच बड़ी संख्या में लोगों ने इस बेमिसाल शख्सियत को अश्रुपूर्ण नेत्रों से अंतिम विदाई दी। भारतीय फिल्मों के इतिहास में मोहब्बत के मसीहा के रूप में पहचान बनाने वाले देव साहब का 3 दिसंबर को 88 वर्ष की उम्र में यहां के एक होटल में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इस मौके पर देव आनंद के बेटे सुनील और बेटी देविना सहित लॉर्ड मेघनाद देसाई, भारत के राजदूत राकेश प्रसाद, लॉर्ड करण बिलीमोरिया और करतार ललवानी मौजूद थे।

भारत में भले ही देव आनंद के प्रशंसक अपने चहेते स्टार की अंतिम झलक नहीं देख पाए, लेकिन उनकी अस्थियां मुंबई ले जाईं जाएंगी, जहां उन्होंने करीब 60 सालों तक लगातार प्रशंसकों का मनोरंजन किया। देव आनंद के बेटे सुनील आनंद के अनुसार पूरा परिवार 14 दिसंबर को देव साहब की अस्थियां लेकर मुंबई आएगा। 15 दिसंबर को मुंबई के बाणगंगा में विसर्जन किया जाएगा। उसी दिन शाम को देव आनंद की स्मृति में बॉलीवुड की ओर से शोक सभा का आयोजन होगा और महबूब स्टूडियो में देव आनंद को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

लंदन के विंबल्डन कॉमन के बेहद खूबसूरत स्थान और 47 एकड़ में फैले जिस शवदाह गृह में देव साहब का अंतिम संस्कार किया गया वहां जाने-माने अभिनेता डेविड लीन, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री केलेमेट एटली, विंसटन चर्चिल की पत्नी, मलेरिया रोग की दवा के खोजकर्ता सर रोनॉल्ड रास, मूर्तिकार जैकॉब एप्सटीन, पुरातत्ववेदी हावर्ड कारटर का भी अंतिम संस्कार किया गया था।